आयकर रिटर्न : इन पांच बदलावों को जरूर जानें

 

आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई बेहद निकट है।वहीं पिछले दिनों रिटर्न को लेकर कई बदलाव किए गए। इस तारीख तक रिटर्न नहीं भरने से आपका आईटीआर विलंबित माना जाएगा। हालांकि इस सबसे जरूरी काम को निपटाने के दो तरीके हैं। एक तो इसे किसी टैक्स पेशेवर के जिम्मे छोड़कर मुक्ति पाई जाए और दूसरा कि स्वयं इसे भरने की जिम्मेदारी उठाएं तथा इस बाबत मुकम्मल जानकारी हासिल की जाए। खुद आईटीआर भरने से पहले अपडेट हो जाएं और पांच बातों का जरूर ध्यान रखें। पेश है बिजनेस डेस्क की रिपोर्ट-

1- आईटीआर के फॉर्म में बदलाव
आयकर रिटर्न की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इसके फॉर्म में कुछ बदलाव किया है। इन बदलावों को जानना बहुत जरूरी है। वर्तमान आकलन वर्ष के लिए नौ की जगह सात आईटीआर फॉर्म ही जारी किए गए हैं। पहले के तीन आईटीआर फॉर्म आईटीआर-2, आईटीआर-2ए और आईटीआर-3 को पुनर्गठित किया गया है और उनकी जगह आईटीआर-2 पेश किया गया है। इसी तरह आईटीआर-4 और आईटीआर-4एस (सुगम) की फिर से नंबरिंग कर आईटीआर-3 और आईटीआर-4 (सुगम) किया गया है। टैक्स2विन डॉट इन के सह संस्थापक और सीईओ अभिषेक सोनी कहते हैं, नया आईटीआर-1 (सहज) फॉर्म सिर्फ एक पेज का है और इसे सालाना 50 लाख तक की आय (कर योग्य) वाले भर सकते हैं। यह फॉर्म वेतन से आय, ब्याज से आय और प्रॉपर्टी से आय वाले लोगों के लिए हैं। अभिषेक के अनुसार, इसके अलावा 50 लाख सालाना से अधिक आय अथवा एक से अधिक प्रॉपर्टी वाले लोगों के लिए आईटीआर-2 है। नांगिया एंड कंपनी, एलएलपी. के पार्टनर सूरज नांगिया का कहना है कि इससे इतर, आईटीआर-1 (सहज) फॉर्म में टैक्स की गणना और कटौती के अनुकूल बनाया गया है। इस तरह केवल धारा जैसे 80सी, 80डी और 80टीटीए के तहत कटौती को उल्लिखित किया गया है और शेष को अन्य के बॉक्स में दिखाना होगा।

2- रिटर्न भरने के लिए आधार जरूरी
वित्त विधेयक, 2017 में आयकर रिटर्न भरने के लिए आधार नंबर को आवश्यक कर दिया गया है। यह व्यवस्था 1 जुलाई, 2017 से प्रभावी हो गई है। हालांकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को इसकी अनुमति भी दे दी है। इसके बाद आयकर रिटर्न भरने के लिए 12 अंकों का आधार नंबर अथवा 28 अंकों का आधार पंजीकरण नंबर जरूरी हो गया है। गत वर्ष तक इस व्यवस्था को वैकल्पिक रखा गया था। अपने आधार को पैन से जोड़ने के लिए http://www.incometaxindiaefiling.gov.in पर जाकर Link Aadhar पर क्लिक करें। इसके पश्चात नाम के कॉलम में नाम और आधार नंबर के कॉलम में आधार नंबर देकर इस प्रक्रिया को पूर्ण करें। यह पूरी प्रक्रिया काफी सरल है।

3- आईटीआर फॉर्म के नए खंडों को जानें
पिछले साल तक आयकरदाता को डिविडेंड से प्राप्त आय को आयकर से छूट हासिल थी। इसके लिए डिविडेंड की राशि मायने नहीं रखती थी। अब डिविडेंड से होने वाली आय यदि 10 लाख रुपये से अधिक है तो उस पर 10 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा और इसे शेड्यूल ओएस में दर्शाना आवश्यक होगा। अशोक माहेश्वरी एंड एसोसिएट्स एलएलपी के पार्टनर अमित माहेश्वरी के अनुसार, डिविडेंड आय के अलावा भारत में पंजीकृत और पेटेंट डेवलप करने वालों के लिए यदि रॉयल्टी से आय होती है तो उस पर भी 10 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा। इसे भी शेड्यूल ओएस में दिखाना होगा।

वित्त विधेयक 2013 के अनुसार, धारा 80ईई को पेश किया गया था, जो दो वित्त वर्ष 2013-15 तक के लिए उपलब्ध है। इसी धारा के तहत पहली बार घर खरीदने वाले को होम लोन के एक लाख रुपये तक के ब्याज पर कटौती (दोनों साल के लिए) की सुविधा दी गई। यह छूट धारा 24(बी) के तहत दो लाख रुपये के अतिरिक्त है। धारा 80ईई को आकलन वर्ष 2017-18 के लिए फिर से बहाल किया गया है। इसमें प्रति वर्ष 50 हजार की छूट दी गई है, जो वित्त वर्ष 2016-17 से होम लोन पूरा होने तक जारी रहेगी। ब्याज पर कटौती की यह छूट तभी मान्य होगी जब मकान की कीमत 50 लाख रुपये और होम लोन 35 लाख रुपये कम हो। साथ ही होम लोन वित्त वर्ष 2017 में पास हुआ हो। माहेश्वरी ने बताया कि होम लोन के ब्याज भुगतान की आदायगी पर कटौती के फायदे का दावा करने के लिए आईटीआर फॉर्म के शेड्यूल श्क- अ में व्यवस्था की गई है।

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