आतंकवाद के खिलाफ ट्रंप का मिला साथ, मोदी के दौरे से और क्या हासिल हुआ भारत को?

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मेहमान थे. व्हाइट हाउस में डोनाल्ड और मेलानिया ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया. दोनों नेताओं के बीच द्वीपक्षीय और वैश्विक हित के मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई. ट्रंप ने मोदी को महान नेता और भारत को अमेरिका का सच्चा दोस्त बताया. मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका वैश्विक विकास के इंजन हैं और ट्रंप की मेक अमेरिका ग्रेट अगेन और उनके न्यू इंडिया मिशन से दुनिया की बेहतरी में मदद मिलेगी. पीएम मोदी अमेरिका के बाद नीदरलैंड के दौरे पर पहुंच गए हैं. लोगों की निगाह इस बात पर है कि आखिर पीएम मोदी के इस दौरे से भारत को क्या हासिल हुआ. इस दौरे की उपलब्धियां क्या रहीं?

1. आतंकवाद के खिलाफ साथ आए भारत-अमेरिका
मोदी-ट्रंप की पहली मुलाकात में आतंकवाद को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत करीब 40 मिनट चली. साझा बयान में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और भारत दोनों आतंकवाद से प्रभावित हैं. भारत के साथ सुरक्षा साझेदारी बेहद अहम है. हम चरमपंथी इस्लामी आतंकवाद का खात्मा करेंगे. लंबा समय से भारत आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई की अपील करता रहा है. ट्रंप का आतंकवाद से लड़ाई का खुला ऐलान इस दिशा में बड़ी सफलता है. भारत और अमेरिका ने साझा बयान में पाकिस्तान से कहा कि वह पाकिस्तान आधारित आतंकवादी समूहों द्वारा किए 26/11 हमले, पठानकोट हमले और अन्य सीमा पार हमलों में शामिल साजिशकर्ताओं को शीघ्र न्याय के दायरे में लाए. भारत और अमेरिका ने पाकिस्तान से ये भी कहा कि वह अपनी धरती का इस्तेमाल आतंकियों की शरणस्थली के रूप में किए जाने से रोके. पड़ोसी देश पाकिस्तान की आतंक नीति के खिलाफ भी अमेरिका खुलकर साथ आया है. हिज्बुल समेत तमाम आतंकी संगठनों और डी कंपनी को पाकिस्तान से मिल रहे समर्थन का भी जिक्र किया गया है साथ ही पाकिस्तान को इनके समर्थन से बचने की चेतावनी दी गई है

2. सलाउद्दीन ग्लोबल टेररिस्ट घोषित
प्रधानमंत्री मोदी की ट्रंप से मुलाकात से कुछ घंटे पहले अमेरिका ने आतंकवाद से लड़ाई में भारत की कोशिशों को एक बड़ा समर्थन दिया. अमेरिका ने हिज्बुल चीफ सैयद सलाउद्दीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया है. साथ ही, अमेरिका ने कश्मीर में हुए हिज्बुल के आतंकी हमलों का भी जिक्र किया है. सैयद सलाउद्दीन आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन का सरगना है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बीते साल कश्मीर में हुए आतंकी हमलों में सलाउद्दीन का हाथ था और वह कश्मीर घाटी में आतंकी फैलाने के मकसद से आतंकियों को ट्रेनिंग देता था. सलाउद्दीन के संगठन हिज्बुल ने जम्मू कश्मीर में हुए कई आतंकी वारदातों की जिम्मेदारी ली थी. जिनमें अप्रैल 2014 के धमाके शामिल हैं, जिसमें 17 लोग घायल हुए थे. बयान में कहा गया है इन्हीं सभी वारदातों को आतंकवाद की श्रेणी में रखते हुए उसे अतंरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया गया है.

3. अफगानिस्तान में भारत की बड़ी भूमिका स्वीकार
अमेरिका ने अफगानिस्तान की स्थिरता में भारत की बढ़ती भूमिका की सराहना की. अमेरिका ने कहा कि अफगानिस्तान में बढ़ती अस्थिरता हमारे लिए चिंता का विषय है. पीएम मोदी ने कहा कि हम अमेरिका से इस विषय पर करीबी परामर्श, संवाद और समन्वय स्थापित कर रहे हैं. साझे बयान कहा गया कि अफगानिस्तान में शांति-स्थिरता, प्रगति के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे. ये पाकिस्तान और चीन के गठजोड़ के लिए बड़ी झटका है. गौरतलब है कि भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंध अच्छे हैं और पाकिस्तान की ओर से सड़क मार्ग से आ रही दिक्कतों को देखते हुए पिछले हफ्ते ही भारत-अफगानिस्तान ने हवाई व्यापारिक कॉरिडोर की शुरुआत की थी. पाकिस्तान के मित्र चीन ने भी भारत के इस पहल की आलोचना की.

4. वैश्विक मंच पर भारत के बड़े रोल को समर्थन
आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने के अलावा भारत और अमेरिका के बीच मध्य पूर्व के देशों के साथ सहयोग बढ़ाने में भी सहयोग करेंगे. दोनों देशों ने उत्तर कोरिया की भड़काऊ नीतियों की आलोचना की और उसके परमाणु कार्यक्रम को क्षेत्रीय और दुनिया के लिए खतरा बताया. इसके अलावा डिजिटल मिशन, तकनीकी विकास और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई.

5. डिफेंस में मजबूती, F-16 के बाद गार्डियन ड्रोन डील को मंजूरी
अमेरिका ने भारत को बड़े डिफेंस साझेदार के रूप में स्वीकार किया है. अभी हाल ही में अमेरिका F-16 विमान के भारत के निर्माण को लेकर समझौता हुआ. इसके बाद अब मोदी के दौरे के दौरान अमेरिका से नेवी के लिए गार्डियन ड्रोन को लेकर डील को भी मंजूरी मिल गई है. चीन और पाकिस्तान के खिलाफ भारत की रक्षा ताकत को इससे और मजबूती मिलेगी.

पहली मुलाकात में दोनो नेताओं के बीच काफी गर्मजोशी दिखी. मोदी दुनिया के पहले नेता हैं जिनके लिए ट्रंप ने व्हाइट हाउस में डिनर का आयोजन किया. पीएम मोदी ने ट्रंप को सपिरवार भारत आने का न्योता दिया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया. अब दोस्ती का नया अध्याय दिल्ली में लिखा जाएगा. जिसपर पूरी दुनिया की निगाह रहेगी.

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