मानसरोवर यात्रा: श्रद्धालुओं को प्रवेश न देने पर बोला चीन, हम भारत के संपर्क में

 

चीन ने आज कहा कि सिक्किम में नाथू ला दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 47 भारतीय श्रद्धालुओं को प्रवेश देने से इनकार करने के मुद्दे पर उसके और भारत के बीच बातचीत जारी है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेंग सुहांग ने संवाददाताओं से कहा, जहां तक मेरी जानकारी है दोनों सरकारें इस मुद्दे पर संपके में हैं हालांकि उन्होंने इस बाबत अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया कि प्रवेश देने से इनकार करने की वजह भूस्खलन और बारिश जैसे मौसम संबंधी मुद्दे हैं जिनकी वजह से चीनी अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को भारत—चीन सीमा पर ही रोक दिया।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों द्वारा इस मुद्दे पर चर्चा की जा रही है।
चीन ने पिछले हफ्ते नाथू ला के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 47 भारतीय श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को प्रवेश देने से इनकार कर दिया था।
श्रद्धालुओं को 19 जून को चीन के इलाके में प्रवेश करना था लेकिन खराब मौसम के कारण यह हो न सका और उन्हें आधार शिविर में ही रूकना पड़ा। इसके बाद उन्होंने 23 जून को फिर से उधर जाने की कोशिश की लेकिन चीन के अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को इसकी इजाजत नहीं दी।
नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा कि नाथू ला के जरिए यात्रा में श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और भारत इस मुद्दे को चीन के समक्ष उठा रहा है।
यात्रा पर अनिश्चितता के बादल
चीन के अधिकारियों का कहना है कि सड़कों की मरम्मत में कुछ और समय लगेगा और भारतीय श्रद्धालु यात्रा पर जल्द आगे नहीं बढ़ सकेंगे, ऐसे में यात्रा पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
चीन के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें भारतीय श्रद्धालुओं की सुरक्षा की चिंता है इसीलिए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। जिन श्रद्धालुओं को चीन ने अपनी सीमा में आगे जाने से रोक दिया वे अपने अपने राज्य लौट चुके हैं।
चीन के तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में हर साल सैकड़ों भारतीय श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाते हैं। इस वर्ष, कुल 350 श्रद्धालुओं नाथू ला के जरिए यात्रा के लिए पंजीयन करवाया है, ये यात्री सात जत्थों में यात्रा पर जाने वाले हैं।
2015 में नाथू ला के जरिए शुरू हुयी थी यात्रा
वर्ष 2015 में दोनों देशों ने सिक्किम में नाथू ला के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा के नए मार्ग को बड़े जोरशोर से शुरू किया था, ऐसे में 47 श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को इजाजत नहीं देना हैरानीभरा है।
कैलाश यात्रा के इस दूसरे मार्ग पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी थी।
वर्ष 2015 तक विदेश मंत्रालय यात्रा का आयोजन हिमालय में लीपू दर्रे के रास्ते ही करता था जो भारत में उत्तराखंड के कुमाउं क्षेत्र को तिब्बत के पुराने व्यापारिक कस्बे तकलाकोट से जोड़ता है।
नाथू ला के नए रास्ते के जरिए 1500 किमी लंबे मार्ग पर यात्री नाथू ला से कैलाश की यात्रा बस के जरिए कर सकते हैं।
इस नए मार्ग से यात्रा में आने वाली कठिनाइयां भी कम होती हैं और समय भी कम लगता है, ऐसे में और अधिक संख्या में श्रद्धालु खासकर बुजुर्ग लोगों का यात्रा पर जाने का सपना पूरा हो सकता है।
वैसे भी दोनों देशों के संबंधों में सीपीईसी तथा भारत के एनएसजी प्रयास समेत कई मुद्दों पर तल्खी बनी हुई है।
इस महीने की शुरूआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन से इतर कजाख की राजधानी अस्ताना में मुलाकात की थी।
इस मुलाकात में मोदी ने कहा था कि दोनों पक्षों को सहयोग में संभावना तलाशने, संवाद मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग बनाने, एक दूसरे की चिंताओं का सम्मान करने और मतभेदों से उचित ढंग से निबटने का अनुरोध किया था।

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