एमसीडी द्वारा पैसों की बर्बादी, जहां जरूरत नहीं वहां बन रही हैं नालियां

 

दिल्ली के सिद्धार्थ एक्सटेंशन में डीडीए कॉलोनी की नालियों को बेवजह तोड़कर दोबारा बनाया जा रहा है. जिसकी वजह से लोग परेशान हैं. जनता के पैसों
की बर्बादी का आलम ये है कि जहां जरूरत नहीं वहां नालियां बनाई जा रही हैं.

क्या है पूरा मामला?
डीडीए द्वारा बनाये गई सिद्धार्थ एक्सटेंशन की कॉलोनियों में इन दिनों जोर शोर से नालियों को बनाने का कार्य प्रगति पर है. लेकिन यहां के रहने वालों को ये समझ नहीं आ रहा कि बनी बनाई नालियों को आखिर तोड़कर नए सिरे से क्यों बनाया जा रहा है. लोगों का आरोप है कि एक तो एमसीडी चुनाव से पहले बिना वजह नालियां तोड़ दी गईं फिर डेढ़ महीने बाद कार्य जैसे तैसे शुरू हुआ तो उसमें भी एक रसूकदार परिवार के कहने पर नालियों का रुख मोड़ दिया गया.

क्यों नाराज़ हैं लोग ?
यहां नालियों को बनाने के लिए सभी घरों के बाहर बने रैंप तोड़े जा रहे हैं, क्योंकि लोगों ने नालियों के ऊपर अतिक्रमण कर रैंप बना दिये हैं. रैंप टूटने से लोगों में नाराज़गी नहीं है लेकिन इस पूरी कॉलोनी में एक घर ऐसा है जिनपर ये नियम लागू नहीं होता. दरअसल यह एक सिविल इंजीनियर साहब का मकान है, जिनके एमसीडी में रसूक के चलते उनके घर के रैंप को कोई नुकसान न पहुंचे इसलिए नालियां उसके 4 फीट आगे से घूमकर निकाली गई हैं. जिसके चलते समान रूप से नाली का बहाव रुक जायेगा और बरसात में दिक्कत होगी.

महीनों तक लटका था काम
आपको बता दें कि जब ये काम शुरू हुआ था तब यहां के पार्षद कांग्रेस के फरहाद सूरी थे और अब मौजूदा पार्षद भी कांग्रेसी ही है. यहां के बाशिंदों का कहना है कि पुरानी नालियां बिल्कुल सही अवस्था में थीं. फिर जनता के पैसों की बर्बादी क्यों और उस पर भी एक घर को कैसे और क्यों फायदा पहुचायां जा रहा है. कई बार शिकायतें करने के बाद भी कोई कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही.

बरसात में होगी दिक्कत
बिना किसी लेआउट के तैयार की जा रही ये नालियां आने वाले दिनों में मुसीबतों की जड़ बन सकती है. लोगों का कहना है कि पहले ही बरसात में यह नालियां भरी होती हैं और ऊपर से एक घर के फायदे को देखते हुए नालियां घुमावदार और ऊंची नीची बनाई जा रही हैं. जिससे नालियों के पानी की निकासी सही तरीके से नहीं हो पायेगी और खामियाजा पूरे कॉलोनीवासी भुकतेंगे. ऐसे में ये सोचने वाली बात है कि पूरी दिल्ली में ऐसे कितने ही इलाके हैं जहां नालियां मरम्मत को रो रही हैं, ऐसी कितनी जगह हैं जहां नालियां हैं ही नहीं. ऐसे में वहा नालियां बनवाने की क्या जल्दी थी जहां जरूरत ही नहीं है. अब ये जनता के पैसों की बर्बादी नहीं तो क्या है.?

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