2 साल में सिसोदिया-सत्येंद्र जैन ने किए धुआंधार विदेश दौरे, बताईं दिलचस्प वजहें

 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सत्ता संभालने के बाद सिर्फ एक बार विदेश गए. वो भी रोम जहां मदर टेरेसा को संत का दर्जा दिया जा रहा था, लेकिन केजरीवाल के दो राइट हैंड सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया ने धुआंधार विदेशी यात्राएं कीं और अब उन्हीं यात्राओं पर सवाल उठ रहे हैं. सिसोदिया अप्रैल 2015 में एथेंस और अगस्त 2015 में ब्राजील गए. इसके बाद सितंबर 2015 में आस्ट्रेलिया, मार्च 2016 में लंदन, मई में बर्लिन और फिर सितंबर में फिनलैंड होकर आए.

सत्येन्द्र जैन सितंबर 2015 में मैनचेस्टर गए, अक्टूबर 2015 में स्वीडन की सैर की, मार्च 2016 में मलेशिया के दौरे पर गए और सितंबर 2016 में केजरीवाल के साथ रोम भी गए. फिर इसी साल जनवरी में थाइलैंड की यात्रा भी कर आए. यहां सवाल सिर्फ विदेश यात्रा का नहीं है, बल्कि आरटीआई में बताई गई वजहों का है. इसमें विदेश दौरे की जो वजहें बताई गई हैं, वे बेहद दिलचस्प हैं. वहीं, आरटीआई कार्यकर्ता संजीव जैन ने कपिल मिश्रा को दिल्ली के मंत्रियों के विदेश दौरे से जुड़ी और जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है. ऐसे में विदेश दौरे को लेकर आप के नेताओं के कई राज सबके सामने आ सकते हैं.

विदेश दौरे की दिलचस्प वजहें..
* मनीष सिसोदिया ग्लोबल वॉटर समिट में हिस्सा लेने एथेंस गए, जबकि दिल्ली के जल मंत्री कपिल मिश्रा थे.
* ब्राजील सिसोदिया ये सीखने गए कि दुनिया में स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में क्या नए ट्रेंड आ रहे हैं.
* ऑस्ट्रेलिया में सिसोदिया यह जानने के लिए गए कि वैट और जीएसटी का वहां कैसे इस्तेमाल हो रहा है.
* वह लंदन में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स राजनीति पर आयोजित कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने गए.
* सिसोदिया बर्लिन में जर्मन हैबिटेट फोरम में हिस्सा लिया. फिनलैंड में वहां की शिक्षा व्यवस्था का समझा, जबकि फिनलैंड की जनसंख्या 55 लाख है. यानी पूर्वी दिल्ली की जनसंख्या से कम जनसंख्या वाले देश फिनलैड से शिक्षा व्यवस्था कैसे क्या सीखी जा सकती है ये सवाल तो है?
* आरटीआई से मिले दस्तावेज बताते हैं कि सत्येन्द्र जैन ने भी जहां-जहां सरकारी खर्च पर दौरा किया, वहां से ज्यादा दिल्ली को उनकी जरूरत थी. क्योंकि पीडब्लूडी से लेकर गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय तक उनके पास ही रहे.
* सतेंद्र जैन अपनी 10 सदस्यीय टीम के साथ मैनचेस्टर में हेल्थ एंड केयर इनोवेशन एक्सपो में हिस्सा लेने गए.
* एयर पॉल्यूशन, स्मार्ट लिविंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और वेस्ट एंड वाटर मैनेजमेंट को कैसे बेहतर किया जाए, ये समझने सत्येंद्र जैन स्वीडन गए.
* सतेंद्र जैन मलेशिया एलेवेटेड बीआरटी देखने गए.
* मदर टेरेसा को संत का दर्जा दिए जाने के मौके पर रोम में उनकी क्या जरुरत थी, यह बात भी लोगों के गले नहीं उतर रही है.
* थाइलैंड में बैंकॉक कन्वेंशन सेंटर के कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

दरअसल विदेश यात्राएं तो देश में हर सरकार का हर मंत्री करता है और देश के पीएम भी विदेश यात्राओं पर खूब जाते है. मसलन 10 बरस में मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओ पर 699 करोड़ रुपये खर्च हो गए. वहीं मौजूदा पीएम की सिंतबर 2016 तक की विदेश यात्रा पर 275 करोड़ रुपये खर्च हो चुके है. खर्च के इस लिहाज से मनीष सिसोदिया और सत्येन्द्र जैन की विदेश यात्रा कहीं नहीं टिकती है, क्योकि आरटीआई से मिले दस्तावेजों के मुताबिक मनीष सिसोदिया की ब्राजील, आस्ट्रेलिया,लंदन और बर्लिन की यात्राओं पर जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने करीब 36 लाख रुपये खर्च किया.

एथेंस की यात्रा को दिल्ली जल बोर्ड ने प्रायोजित किया तो पैसा उसी विभाग ने दिया, जबकि फिनलैंड का दौरा शिक्षा विभाग ने प्रायोजित किया था, लेकिन पैसा जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट को ही देना पड़ा. अलबत्ता कितना पेमेंट हुआ, इसकी सूचना नहीं दी गई. आरटीआई से मिले दस्तावेज ही बताते हैं कि सत्येन्द्र जैन की मैनचेस्टर,स्वीडन, मलेशिया, रोम और थाइलैंड की यात्राओं पर करीब 35 लाख रुपये खर्च हुए. इनमें रोम यात्रा पर खर्च हुए 15 लाख 99 हजार 710 रुपये भी शामिल हैं, जिसमें वह केजरीवाल के साथ गए थे. विदेश यात्राओं को लेकर देश में जो तमाम राज्यों में सरकारों का हाल है, उसी लकीर पर अब दिल्ली सरकार भी चल पडी है. इससे इंकार किया नहीं जा सकता और आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी मुश्किल मौजूदा वक्त में यही हो चली है कि वह दूसरे राजनीतिक दलों की तर्ज पर ही दिखाई देनी लगी है.

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