पानी की मार,कहाँ हो सरकार-गर्मी शुरू होते ही पानी को तरसती दिल्ली

 

गर्मियां शुरू होते ही दिल्ली को पानी की किल्लत से दो-चार होना पड़ता है. सरकार बदली, चेहरा बदला, नहीं बदली तो दिल्ली वालों की किस्मत. जिसमें शायद साफ पानी का सुख नहीं है. दिल्ली की केजरीवाल सरकार के चौबीसों घंटे मिलने वाले साफ पानी के किये गए वायदे की जब हमने पड़ताल की तो नतीजे हैरान करने वाले थे.

पानी को तरस रही लाडो सराय की जनता
दिल्ली के ज्यादातर इलाके पानी नहीं मिलने से नाराज हैं. दिल्ली के लाडो सराय में जहां ज्यादातर किरायदार रहते हैं पानी एक बहुत बड़ी समस्या है.

पानी की किल्लत का कारण
– तीन से चार मंजिला इमारतों के हर फ्लोर पर दो से तीन परिवार रहते हैं. ऐसे में दिन में एक बार एक से दो घंटे जो पानी मिलता है वो इनके लिए काफी नहीं पड़ता.
– पहले दिन में दो बार पानी आया करता था. अब तो एक बार भी मुश्किल से आता है.
– जो पानी आता है वो भी गन्दा और बदबूदार होता है. कम आमदनी वाले इन परिवारों के लिए पानी खरीद कर पीना संभव नहीं होता और मजबूरी में इन्हें गंदा पानी पीना पड़ता है. जिससे बच्चे बीमार हो जाते हैं.
– लाडो सराय की ज्यादातर कॉलोनियों के बीच सकरी गलियों के कारण पानी के टैंकर हर जगह नहीं जा पाते हैं. जिससे इनको दूर से पानी भर कर लाना पड़ता है. जो हर किसी के लिए संभव नहीं है.

अम्बेडकर नगर में भी पानी की किल्लत
दक्षिणपुरी के अम्बेडकर नगर के डी ब्लॉक की महिलाएं पानी की किल्लत से बहुत परेशान हैं और जल्द किसी समाधान की गुहार लगा रही हैं. पिछले चार-पांच दिनों से उनके घरों में पानी नहीं आया है. जिससे उनको अब डर सता रहा है कि अगर अभी ये आलम है तो आगे क्या होगा.

गर्मियो में पानी का ना आना अपने आप में बहुत बड़ी समस्या है पर कभी भूल से अगर पानी आ भी जाता है तो वो भी पीने लायक नहीं होता. यहां हालात इतने खराब हैं कि महिलाओं को रात-रात भर जग कर पहरा देना पड़ता है ये देखने के लिए कि पानी आ रहा है या नहीं. रात में ये महिलायें पानी का इंतजार इस तरह करती हैं मानो कोई अपना दूर से घर आ रहा हो.

खाली बाल्टी लिए पानी आने का इंतजार करतीं महिलाओं का गुस्सा इस बात पर भी है कि पानी नहीं मिलने के बावजूद इनको पानी का भारी भरकम बिल दिया जाता है. दिल्ली का चेहरा बदलने का ख्वाब दिखा कर सरकार में आए अरविंद केजरीवाल शायद अपने किये गए वायदों को भूल गए हैं. तभी तो वो दूसरे राज्यों में सियासी जमीन तलाशने में लगे हैं और यहां जनता उनके दिखाए सपनों को हकीकत में तब्दील होने की बाट जोह रही है.

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