WorldHealthDay: कहीं आपके अपने तो डिप्रेशन के शिकार नहीं,जानें ऐसे

 

कल विश्व स्वास्थ्य दिवस है और इस साल डिप्रेशन को थीम बनाया गया है। क्योंकि डिप्रेशन या मानसिक तनाव इतना बढ़ता जा रहा है कि स्वास्थ्य दिवस के दिन इसपर फोकस करना ज्यादा जरूरी हो गया है। हर कोई कभी ना कभी किसी ना किसी उम्र में आकर इस मानसिक अवस्था से गुजरता है।

हमारे आस-पास हमारे अपने, रिश्तेदार, दोस्त हर कोई ऐसी स्थिति का सामना करता है, लेकिन हम समझ नहीं पाते हैं। जब तक हम समझ पाते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। बातें सब करते हैं, चर्चाएं होती हैं, लेकिन डिप्रेशन को समझ पाना बहुत ही मुश्किल है।

हमारे अपने ही इस दलदल में फंसते जाते हैं और हम उनके लिए कुछ नहीं कर पाते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार हर तीन में से एक इंसान डिप्रेशन का शिकार होता है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक 2006 से 2015 के बीच पूरी दुनिया में डिप्रेशन के मरीजों की संख्या में 18 फीसदी से ज्यादा हो गई है। पूरे विश्व में लगभग 320 करोड़ डिप्रेशन के शिकार हैं।

कहीं आपका अपना तो डिप्रेशन का शिकार नहीं

जीवन में समस्याएं आती हैं, रोजाना हमारे साथ कुछ ऐसा होता है जो हमारी इच्छा और हालात के विपरीत होता है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम जीवन से निराश हो जाएं। बदलती लाइफस्टाइल आपको जितना मॉर्डन कर रही है उतना ही निराशाजनक भी कर रही है।

हम हर छोटी बात पर पैनिक होने लगे हैं। उदास होने लगे हैं और निराश भी। लेकिन अगर हम किसी भी समस्या को लंबे समय तक लेकर चलें और सोचें कि ये जीवन का हिस्सा है और हम जीवन के प्रति वो प्यार खो बैठें तो ये अच्छा नहीं है। यही डिप्रेशन की ओर बढ़ता कदम माना जाएगा।

लाइव हिन्दुस्तान आपको बताएगा कि आप कैसे समझेंगे कि आपका अपना डिप्रेशन का शिकार हो रहा है। उसके अंदर मानसिक तनाव बढ़ रहा है। वैसे ये अचानक नहीं होता है, लंबे समय तक इसके संकेत दिखते हैं। जब कोई भी आदत लंबे समय तक आपके अंदर घर करने लगे, आप नकारात्मक तरीके से पेश आने लगे तो समझें कि कुछ गड़बड़ है।

ये हैं लक्षण

अगर आपका अपना छोटी-छोटी बातों पर परेशान रहने लगे। हर बात पर गुस्सा करने लगे तो ध्यान दें और पूछें आखिर बात क्या है।

किसी की बात पर आपको विश्वास ना हो, किसी से मिलने का मन ना करें, तो आप समझ लें कि आप डिप्रेशन के शिकार होते जा रहे हैं।

अगर अचानक आपके रातों की नींद उड़ जाए, रात को सोते-सोते अचानक जागकर बैठ जाएं, डर लगे तो भी आपको ध्यान देने की जरूरत है।

अगर आप इतने परेशान रहने लगे कि आपको अपनी जिंदगी प्यारी ना लगें, आप सुसाइड करने के बारे में सोचने लगें। जब जिंदगी से निराश हो जाएं और जिंदगी खत्म करने का दिल करने लगे। तो आप अपनों से बात करें और उन्हें समझाएं। नहीं हो तो मनोचिकित्सक के पास ले जाएं।

अगर आपका दोस्त या बच्चा चुपचाप एक कोने में बैठा रहे। शांत रहे और किसी से बात न करे तो उससे बात करें और उसके दिल का हाल लें।

खाना अच्छा न लगे, चिड़चिड़ाहट हो, खामखा नाराजगी हो, नकारात्मक विचार आए, आत्मविश्वास खत्म होता सा नजर आए तो तुरंत बात करें। अकेले में न रहने दें। अपने दोस्त को सहारा दें और एक अच्छे दोस्त की तरह उसके आस-पास रहें।

कई बार अकेलेपन से डर लगता है लेकिन अकेले रहने का मन भी करता है। भीड़ अच्छी नहीं लगती है। आपके शरीर के कई अंगों में दर्द होने लगता है। विटामिन्स की कमी होती है। तो मतलब आपकी मानसिक स्थिति अच्छी नहीं है।

हम इतने मॉर्डन होते जा रहे हैं, टैबलेट, स्मार्ट फोन और इंटरनेट के जमाने में जहां एक क्लिक पर सब मिल जाता है, वहां जज्बात कहीं खो से गए हैं। हमें तुरंत सब चीजें मिलने लगी है, इसलिए चीजें और रिश्तों की अहमियत कम हो गई है। हम जज्बातों से दूर हो गए हैं, असंवेदनशील हो गए हैं। ये सही नहीं है। हमें इस लाइफस्टाइल से थोड़ा दूर होकर असलियत में आना चाहिए। जो हमारी खुद की जिंदगी है, लोगों से रिश्तेदारों से बनी है। हमें किसी रेस में नहीं जाना है।

जिंदगी में बैलेंस बनाएं

ऑफिस, घर और अपनी सोशल लाइफ में एक बैलेंस बनाएं। सब कुछ थोड़ा थोड़ा करें। जिदंगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन कभी ज्यादा खुश और कभी ज्यादा दुखी नहीं होना है। अपने जज्बातों पर काबू पाना है। लेकिन ये भी जरूरी है कि आप आजादी से अपने जज्बात अपनों के सामने रख सकें। अपने आस-पास अपनों का वातावरण हो।

संपर्क बनाए रखें

परिवार, रिश्ते और दोस्तों के साथ एक संपर्क बनाएं रखें। भले आप कितना भी व्यस्त हैं, दुनिया कहीं भी जा रही है, लेकिन पूरे दिन में कम से कम कुछ वक्त अपने और अपनों के लिए निकालें। उनसे बातें करें और प्यार करें। कम्यूनिकेशन को बरकरार रखें।

अच्छे श्रोता बनें

जरूरी है कि आप केवल अपनी बातें न कहें, बल्कि अच्छे श्रोता बने और लोगों की बातें सुने। अगर आपका कोई अपना कुछ कहना चाह रहा है, उसके लिए वक्त निकालें। दोस्त, परिवार और अपनों के लिए वक्त निकालें और उनकी बातें सुनें।

हॉबी से मोहब्बत करें

काम के अलावा अपनी हॉबी से प्यार करें। आपको जो भी अच्छा लगता है उसपर काम करें। उसके लिए वक्त निकालें। हॉबी जो आपको खुशी दे, एनर्जी दे। उसके प्रति ऊर्जावान हों। उसके लिए समय निकालें।

धूप

अगर सुबह सुबह रोजाना सूरज के सामने या धूप से रू-ब-रू हुआ जाए तो आपको कभी डिप्रेशन नहीं होगा।खुद से और सूरज से 5 मिनट बात करें। देखें इसका असर कितना गहरा होगा।

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